Author Details

Pen Name:'akbar'
Real Name:Syed Akbar Hussain Rizvi
Born:16 Nov 1846 | Allahabad, Uttar pradesh
Died:09 Sep 1921
The greatest Urdu poet of humour and satire who was a Sessions judge at Allahabad.The greatest Urdu poet of humour and satire who was a Sessions judge at Allahabad.
थोड़े दिन का इश्क़ हम नहीं किया करते,
शहर का आशिक हूँ, यूँ ही किसी से प्यार किया नहीं करते।
ऐसा नहीं है कि जिंदगी ने हमेशा गम ही दिए हैं,
पर क्या है ना, हँसने के मौके ज़रा कम ही दिए हैं!
More Shayari
Motivational Shayari

कपड़े सफ़ेद धो के जो पहने तो क्या हुआ,
धोना वही जो दिल की सियाही को धोइए।
~ शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
निगह बुलंद सुख़न दिल-नवाज़ जाँ पुर-सोज़,
यही है रख़्त-ए-सफ़र मीर-ए-कारवाँ के लिए।

कपड़े सफ़ेद धो के जो पहने तो क्या हुआ,
धोना वही जो दिल की सियाही को धोइए।
~ शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

कपड़े सफ़ेद धो के जो पहने तो क्या हुआ,
धोना वही जो दिल की सियाही को धोइए।
~ शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
जीवन का सबसे बड़ा गुरू वक्त होता है,
क्योंकि जो वक्त सिखाता है वो कोई नहीं सिखा पाता।

कपड़े सफ़ेद धो के जो पहने तो क्या हुआ,
धोना वही जो दिल की सियाही को धोइए।
~ शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले,
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है।
Festival Shayari

कहने लगे अब आइए सर पर है त्यौहार
घर मेरा नज़दीक है तारों के उस पार
कहने लगे अब आइए सर पर है त्यौहार
घर मेरा नज़दीक है तारों के उस पार
~ Bhagwan Das Ijaz
कहने लगे अब आइए सर पर है त्यौहार घर मेरा नज़दीक है तारों के उस पार ~ Bhagwan Das Ijaz

जब देश में थी दिवाली, वो झेल रहे थे गोली
जब हम बैठे थे घरों में, वो खेल रहे थे होली
जब देश में थी दिवाली, वो झेल रहे थे गोली
जब हम बैठे थे घरों में, वो खेल रहे थे होली
~ अज्ञात
जब देश में थी दिवाली, वो झेल रहे थे गोली जब हम बैठे थे घरों में, वो खेल रहे थे होली ~ अज्ञात

'आली' अब के कठिन पड़ा दीवाली का त्यौहार
हम तो गए थे छैला बन कर भय्या कह गई नार
'आली' अब के कठिन पड़ा दीवाली का त्यौहार
हम तो गए थे छैला बन कर भय्या कह गई नार
~ Couplets of Jamiluddin Ali
'आली' अब के कठिन पड़ा दीवाली का त्यौहार हम तो गए थे छैला बन कर भय्या कह गई नार ~ Couplets of Jamiluddin Ali

तुम्हारी तो दिवाली है,
लेकिन मेरी जिंदगी तो तुमने होली कर दी है…!!
तुम्हारी तो दिवाली है,
लेकिन मेरी जिंदगी तो तुमने होली कर दी है…!!
~ अज्ञात
तुम्हारी तो दिवाली है, लेकिन मेरी जिंदगी तो तुमने होली कर दी है…!! ~ अज्ञात

अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह
चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर
अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह
चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर
~ Mushafi Ghulam Hamdani
अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर ~ Mushafi Ghulam Hamdani

अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह
चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर
अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह
चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर
~ Mushafi Ghulam Hamdani
अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर ~ Mushafi Ghulam Hamdani

जब देश में थी दिवाली, वो झेल रहे थे गोली
जब हम बैठे थे घरों में, वो खेल रहे थे होली
~ अज्ञात
जब देश में थी दिवाली, वो झेल रहे थे गोली जब हम बैठे थे घरों में, वो खेल रहे थे होली

'आली' अब के कठिन पड़ा दीवाली का त्यौहार
हम तो गए थे छैला बन कर भय्या कह गई नार
~ Couplets of Jamiluddin Ali
'आली' अब के कठिन पड़ा दीवाली का त्यौहार हम तो गए थे छैला बन कर भय्या कह गई नार

अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह
चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर
~ Mushafi Ghulam Hamdani
अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर

अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह
चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर
~ Mushafi Ghulam Hamdani
अमआ की परी माने-ए-पर्वाज़ है जिस तरह चढ़ते नहीं मुर्ग़ान-ए-शिकम-सेर हवा पर
यहाँ पढ़ें खुशियों से भरी शायरी, जो आपके दिल को छू जाएगी और चेहरे पर मुस्कान लाएगी।

हँसी थमी है इन आँखों में यूँ नमी की तरह.
चमक उठे हैं अंधेरे भी रौशनी की तरह.
~ अज्ञात
हँसी थमी है इन आँखों में यूँ नमी की तरह. चमक उठे हैं अंधेरे भी रौशनी की तरह.
ग़म सीं अहल-ए-बैत के जी तो तिरा कुढ़ता नहीं यूँ अबस पढ़ता फिरा जो मर्सिया तो क्या हुआ

आज जब चाँदनी उतरी थी मिरे आँगन में
चाँद किस लम्हा हुआ मुझ से ख़फ़ा याद आया
~ Alina Itrat
आज जब चाँदनी उतरी थी मिरे आँगन में चाँद किस लम्हा हुआ मुझ से ख़फ़ा याद आया
Funny Shayari
अज्ञात

मैं एक कुत्ता भी Follow कर लूँ तो
मम्मी-मम्मी चिल्ला कर भागती है!
~ अज्ञात

तू मोहब्बत होती तो शायद भुला देता,
साला ये दिल इबादत कर बैठा है।
~ अज्ञात
तू मोहब्बत होती तो शायद भुला देता, साला ये दिल इबादत कर बैठा है।

यूँ तो बहुत से हैं रास्तें, मुझ तक पहुंचने के,
राह-ऐ-मोहब्बत से आना, फासला कम पड़ेगा……!!!
~ अज्ञात
यूँ तो बहुत से हैं रास्तें, मुझ तक पहुंचने के, राह-ऐ-मोहब्बत से आना, फासला कम पड़ेगा……!!!

बिन तेरे मेरी हर खुशी अधूरी है,
फिर सोच मेरे लिए तू कितनी जरूरी है !
~ अज्ञात
बिन तेरे मेरी हर खुशी अधूरी है, फिर सोच मेरे लिए तू कितनी जरूरी है !

कह दो अपने दांतों को, क़ि हद में रहें,
तेरे लबों पे बस मेरे लबों का हक़ है……!!!
~ अज्ञात
कह दो अपने दांतों को, क़ि हद में रहें, तेरे लबों पे बस मेरे लबों का हक़ है……!!!

आप हमेशा-हमेशा के लिए मेरे जीवनसाथी, मेरे प्यार, मेरे सब कुछ है।
~ अज्ञात
आप हमेशा-हमेशा के लिए मेरे जीवनसाथी, मेरे प्यार, मेरे सब कुछ है।
अज्ञात
दिल टूटने की आवाज़ तो नहीं होती, पर इसका दर्द, हमेशा दिल में रह जाता है।
View Shayariअज्ञात
उन का ग़म उन का तसव्वुर उन के शिकवे अब कहाँ अब तो ये बातें भी ऐ दिल हो गईं आई गई
View Shayariज़ेब ग़ौरी
ज़ख़्म ही तेरा मुक़द्दर हैं दिल तुझ को कौन सँभालेगा ऐ मेरे बचपन के साथी मेरे साथ ही मर जाना
View Shayariअज्ञात
“दिल के हर कोने में बस तुम्हारी यादें हैं, जो कभी खत्म नहीं होंगी।”
View ShayariMushafi Ghulam Hamdani
उस के जाने से मिरा दिल है मिरे सीने में दम का मेहमान चराग़-ए-सहरी की सूरत
View Shayariअज्ञात
“जिसे चाहो वो मिल जाए, ये ज़रूरी नहीं, जिसे पा लो उसे चाहो, ये ज़रूरी है।”
View Shayariअज्ञात
तेरे बदलने का दुख नहीं है मुझको, मैं तो अपने यकीन पर शर्मिंदा हूं..!
View Shayariतुम्हारी तो फितरत थी सबसे मोहब्बत करने की,
तुम्हारी तो फितरत थी सबसे मोहब्बत करने की, में बेवजह खुद को खुशनसीब समझने लगा !
अज्ञातसजाए थे ख्वाबों का शहर, तूने एक पल में तोड़ दिया,
सजाए थे ख्वाबों का शहर, तूने एक पल में तोड़ दिया, तेरी बेवफाई से पहले, ये दिल कितना मजबूत था।
अज्ञातये क्या कि तुम ने जफ़ा से भी हाथ खींच लिया
ये क्या कि तुम ने जफ़ा से भी हाथ खींच लिया मिरी वफ़ाओं का कुछ तो सिला दिया होता
अब्दुल हमीद अदमतेरा ख्याल दिल से मिटाया नहीं अभी,
तेरा ख्याल दिल से मिटाया नहीं अभी, बेवफा मैंने तुझको भुलाया नहीं अभी…!!
अज्ञाततुम्हारी तो दिवाली है,
तुम्हारी तो दिवाली है, लेकिन मेरी जिंदगी तो तुमने होली कर दी है…!!
अज्ञातछोड़ दिया हमारा साथ तेरे इनकार के लिए,
छोड़ दिया हमारा साथ तेरे इनकार के लिए, अब तू खुश है तो ख़ुश रह, हम अब इंकार के लिए…!!
अज्ञातदर्द-ए-बेवफ़ाई की तेरे नाम से है जुड़ी,
दर्द-ए-बेवफ़ाई की तेरे नाम से है जुड़ी, तूने तो वफ़ादारी की शान छीन ली है…!!
अज्ञात
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Writing Shayari as a journaling exercise improved emotional intelligence by 25% in individuals over a six-month period.
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शायरी क्यों खास है:
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अपनी हर भावना को शायरी के ज़रिए खास बनाइए। नई शायरी हर दिन!
Top Categories
❤️ अपनी भावनाओं को शायरी में ढालें ❤️
शायरी, वो कला है जो दिल से निकल कर सीधे दिल तक पहुंचती है। हर शब्द में छुपा है अनकही कहानियों का खजाना। आइए, अपने जज़्बातों को खूबसूरत अल्फाज़ों में बदलें।

शायरी के फायदे:
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"शब्द वो पुल हैं, जो दिलों को जोड़ते हैं।"












































